मॉरीशस में श्रद्धा के साथ मनाया गया पर्व, मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
गुरूवार को रामनवमी के पावन अवसर पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। जहां शेखावाटी की धरा से लेकर हिंद महासागर में बसे द्वीप देश मॉरीशस तक जय श्री राम के जयघोष गूंज उठे। भारत से हजारों किलोमीटर दूर मॉरीशस में भी रामनवमी का पर्व पूरे उत्साह और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया गया। यहां की आधे से अधिक आबादी हिंदू होने के कारण यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन कई कार्यालयों में विशेष अवकाश दिया गया। ताकि लोग मंदिरों में जाकर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव में भाग ले सकें। मॉरीशस के ला-लौरा स्थित शिव शक्ति मंदिर में नौ दिवसीय रामकथा के समापन पर भव्य राम जन्मोत्सव का आयोजन हुआ।
मंदिर परिसर भक्ति, भजन और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। इस आयोजन में शेखावाटी अंचल से जुड़े प्रवासी राजस्थानियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। झुंझुनूं के मंडावा निवासी जया, नवलगढ़ के जैन परिवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राजस्थान के परंपरागत वाद्य यंत्रों ढोलक, मंजीरा, खड़ताल, हारमोनियम के साथ भजन गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में सीकर से सविता तिवाड़ी और उनके पति आचार्य पूरण तिवाड़ी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। जिन्होंने पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। उल्लेखनीय है कि मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों की संख्या काफी अधिक है। जिनकी जड़ें 1834 के बाद भारत से गए श्रमिकों से जुड़ी हैं। आज भी इंडो-मॉरिशियन समुदाय भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को पूरे सम्मान के साथ जीवित रखे हुए है। रामनवमी का यह उत्सव एक बार फिर यह संदेश देता है कि भले ही दूरी हजारों किलोमीटर की क्यों न हो, लेकिन आस्था और संस्कृति हमेशा लोगों को एक सूत्र में बांधकर रखती है।
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