बुडाना गांव में दुल्हन पिंकी कुमावत की घोड़ी पर बैठाकर निकाली बिंदोरी
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शादी-विवाह में अक्सर बजने वाला गीत घोड़ी पर होकर सवार चला है दूल्हा यार… इस बार एक नई तस्वीर के साथ साकार होता नजर आया। झुंझुनूं जिले के बुडाना गांव में बुधवार रात परंपराओं से हटकर दूल्हे की जगह दुल्हन घोड़ी पर सवार नजर आई। यह अनोखी पहल समाज में बेटा-बेटी की समानता का सशक्त संदेश दे गई। बुडाना निवासी बसेशर कुमावत ने अपनी बेटी पिंकी कुमावत की शादी से पहले बिंदोरी निकालते हुए पुरानी धारणाओं को तोड़ दिया। उन्होंने बेटों की तरह ही बेटी को घोड़ी पर बैठाया। साफा पहनाया और दूल्हे की वेशभूषा में सजाकर पूरे गांव में बिंदोरी निकाली। जैसे ही सजी-धजी बणी-ठणी पिंकी कुमावत घोड़ी पर सवार होकर निकली। हर किसी के चेहरे पर खुशी झलक उठी। बिंदोरी के दौरान डीजे की धुन पर परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर नृत्य किया और इस अनोखी पहल का स्वागत किया। पिंकी के पिता बसेशर कुमावत ने कहा कि बेटा एक घर को संवारता है। जबकि बेटियां दो-दो घरों को संवारती हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि बेटियों को भी बराबरी का दर्जा दिया जाए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। पिंकी के भाई जयप्रकाश कुमावत और अनिल कुमावत का कहना है कि राजस्थान जैसे राज्य में, जहां लिंगानुपात की चुनौती लंबे समय से बनी हुई है। ऐसी पहलें सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जब तक समाज स्तर पर बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म नहीं होगा। तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। बुडाना गांव की यह बिंदौरी अब एक मिसाल बन गई है। जो यह साबित करती है कि बदलाव की शुरुआत समाज के भीतर से ही होती है। इस अवसर पर झिंडूराम, जुगलाल, विश्वंभरलाल, किशनलाल, बाबूलाल, सरदाराम, प्यारेलाल, राधेश्याम, प्रमोद कुमार, अमित, सूरज, विक्रम, मनीषा, सीमा, कोमल, सिमरन, ममता, नंदू, अनूपूर्णा एवं सोना सहित अन्य परिजन मौजूद रहे।
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