सूरजगढ़ नगरपालिका में विकास का काला सच, तीन माह से वेतन बकाया, वेतन मांग पर 31 कर्मचारी बर्खास्त!
सूरजगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
नगरपालिका में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा जोर-शोर से किया जा रहा है। सड़कें, नालियां, पार्क और अन्य निर्माण कार्यों पर भारी बजट आवंटित होने की बात कही जाती है। लेकिन हकीकत में सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और विकास कागजों तक सीमित दिखता है। ठेका और संविदा कर्मचारी, जो इन कार्यों की असली रीढ़ हैं। तीन महीने से वेतन के लिए मोहताज हैं। सफाईकर्मी, ड्राइवर, क्लर्क और दैनिक मजदूरों की स्थिति दयनीय हो गई है। अब संविदा कर्मचारियों की आंखें नम हैं। एक कर्मी ने बताया कि बेटे की परीक्षा है। फीस और किताबों के लिए पैसे नहीं। घर में आटा-दाल मुश्किल से आ रहा है। एक महिला संविदा कर्मी, जिनके पति भी यहीं काम करते थे। बोलीं — लेकिन अब तो चूल्हा जलाने को भी पैसा नहीं। हमारी जिंदगी की कीमत सिर्फ आश्वासन थी? जब कर्मचारियों ने ईओ से तीन माह के बकाया वेतन की मांग की। तो जवाब में 31 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। एक कर्मी ने कहा कि अधिकारी पहले मार्च-अप्रैल में सैलरी का वादा करते थे। अब नौकरी ही छीन ली। हम अल्प वेतन पर एक-एक रुपये का हिसाब रखते थे। दैनिक मजदूरों की हालत और भी खराब है। वे विकास के सिपाही कहलाते थे। लेकिन अब बेरोजगार होकर जीवन यापन मुश्किल हो गया।
परिवार संकट में हैं—पढ़ाई, दवाइयां, बिजली बिल सब ठप
कर्मचारियों ने तत्काल बकाया वेतन जारी करने और बर्खास्त कर्मियों की बहाली की मांग की है। एक ठेका कर्मी ने कहा कि हम रोज 8-12 घंटे पसीना बहाते हैं—गलियां, नालियां साफ करते हैं। निर्माण में हाथ बंटाते हैं। लेकिन विकास के पैसे हमारे वेतन तक नहीं पहुंचते। प्रशासन के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। नौकरी बर्खास्तगी के बच्चों की फीस, किताबें, घरेलू खर्च सब लटक गए। राशन दुकानों पर उधार बंद हो गया। चूल्हा ठंडा पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले देरी होती थी। लेकिन तीन महीने की देरी और अब बर्खास्तगी ने सब कुछ उजाड़ दिया।
ईओ की मनमानी, आंदोलन की चेतावनी
नगरपालिका प्रशासन पर कर्मचारियों का खून चूसने का आरोप लग रहा है। ईओ की हठधर्मिता से 31 कर्मचारी बर्खास्त हो गए, जबकि वेतन का कोई जुगाड़ नहीं हुआ। सवाल उठ रहा है—बजट की कमी है या प्रबंधन की लापरवाही? या ईओ की जिद? पूरे सूरजगढ़ में यह मुद्दा गूंज रहा है। कर्मचारी पूछ रहे हैं कि हमारा हक कहां गया? विकास के नाम पर हमारी मेहनत का पैसा गायब क्यों? बर्खास्तगी के बाद परिवारों की जिंदगी और दयनीय हो गई है।
बच्चों की शिक्षा, घर का खर्च—सब संकट में
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल बकाया वेतन नहीं दिया गया और बर्खास्त कर्मियों को बहाल नहीं किया गया। तो सामूहिक आंदोलन शुरू होगा। प्रशासन अभी चुप है। क्या यह विकास का ढोंग जारी रहेगा, या कर्मचारियों की पुकार सुनी जाएगी? सूरजगढ़ की जनता इंतजार कर रही है। ईओ तौफीक अहमद से संपर्क नहीं हुआ।













