नगरपालिका में विकास का ढोंग! कर्मचारी पूछ रहे हैं—हमारा हक कहां गया?

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ठेका- संविदा कर्मियों की तनख्वाह के टोटे, होली का चूल्हा ठंडा, कागजों पर विकास की बाढ़, सड़कों पर सन्नाटा, कागजी विकास, हकीकत कुछ और

सूरजगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
विकास के नाम पर करोड़ों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। लेकिन नगर पालिका के ठेका और संविदा कर्मियों को दो माह से तनख्वाह नहीं मिली। प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि विकास कार्यों में भारी राशि खर्च की गई है। सड़कें, नालियां, पार्क—हर जगह काम चल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इतना विकास कहां दिख रहा है? एक ठेका कर्मी ने कहा कि हम रोज 8- 12 घंटे मेहनत करते हैं, गली-नालियों की सफाई से लेकर निर्माण तक सब कुछ हम करते हैं। फिर भी दो माह से सेलेरी नहीं आई। विकास के नाम पर जो पैसे खर्च हुए। वे हमारे वेतन में क्यों नहीं आए? एक संविदा कर्मी की आंखें नम हो गई। कहा कि मेरा बेटा बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहा है। फीस भरनी है। किताबें चाहिए। दो माह से घर में आटा-दाल चावल भी मुश्किल से आ रहा है। विकास दिखाई नहीं देता। लेकिन हमारे खून-पसीने का पैसा कहीं गायब हो गया। ठेका कर्मियों से लेकर ड्राइवर, सफाईकर्मी, क्लर्क—हर स्तर पर रोशनी बुझ गई है। दैनिक मजदूरी वाले मजदूर तो और भी बदतर हालत में हैं। एक ठेका कर्मी ने नाम नही छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारी कहते हैं मार्च-अप्रैल में सेलेरी मिल जाएगी। लेकिन होली आ रही है। बच्चों को नए कपड़े चाहिए। घर में मिठाई चाहिए। संविदा कर्मचारी ने आरोप लगाया कि पहले भी वेतन देरी होती थी। लेकिन दो माह की देरी पहली बार हुई है। हम अल्प वेतन पर काम करते हैं। एक-एक रुपए का हिसाब रखते हैं। अब तो राशन की दुकान पर भी उधार नहीं मिल रहा। क्या हमारी मेहनत का मूल्य सिर्फ आश्वासन है? होली का त्योहार करीब है। लेकिन सूरजगढ़ नगर पालिका के ठेका-संविदा कर्मियों के घरों में रंग नहीं, सिर्फ मायूसी है। होली में गुजिया बनानी है। बच्चे रंग खेलना चाहते हैं। लेकिन चूल्हा जलाने के लिए भी पैसा नहीं, एक महिला संविदा कर्मी उनके पति भी यहीं काम करते हैं। दोनों की सेलेरी नहीं आने से पूरा परिवार संकट में है। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयां, बिजली बिल—हर चीज लटक गई है। एक कर्मी ने भावुक होकर कहा कि हम विकास के सिपाही हैं। लेकिन हमारी हालत बद से भी बदतर हो गई। क्या नगर पालिका मे हमारी जिंदगी की कोई कीमत नहीं? कर्मचारियों की मांग है कि तत्काल दो माह का बकाया वेतन जारी किया जाए। अन्यथा वे सामूहिक आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। प्रशासन अभी चुप है। विकास के नाम पर कर्मचारियों का खून चूसने का यह सिलसिला कब रुकेगा—यह सवाल पूरे सूरजगढ़ में गूंज रहा है। ईओ, तौफीक अहमद ने कहा जो भी पॉसिबिलिटी होती है कर्मचारियों की तनख्वाह का जुगाड़ किया जाएगा। मैं पूछता हूं कितना बजट है।

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