भगवान को कठिन मार्ग से नहीं सच्चे प्रेम से आसानी से पाया जा सकता है
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
स्थानीय स्काउट गाइड मैदान में बिमल शर्मा एवं पुष्पा शर्मा अलसीसर वाले के सहयोग से चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित गोविंददास महाराज ने पूतना वध, श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं, यशोदा माता के साथ बालपन की शरारतें, माखन चोरी, तृणावत, उखल बंधन, यमला अर्जुन, बत्सासुर, बकासुर, अधासुर, धेनुकासुर, कालिया नाग मर्दन एवं गोवर्धन पर्वत धारण की लीलाओं को विस्तार से बताते हुए कहा भगवान कृष्ण के जन्म लेने के बाद कंस ने उनको मारने के लिए बलवान राक्षसी पूतना को भेजते है। पूतना ने भेष बदलकर भगवान श्री कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। तो भगवान श्री कृष्ण ने उसको मौत के घाट उतारकर उसका उद्धार किया। इसके बाद महाराज ने बताया कार्तिक मास में बृजवासी भगवान इंद्र की पूजा करने की तैयारी करते हैं तो भगवान कृष्ण के द्वारा उनको इंद्र की पूजा करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजा करने की बात कहते हैं। तो इंद्र भगवान उनकी बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं और क्रोध से भारी वर्षा करते हैं।
भारी वर्षा देख भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्का अंगुली पर उठाकर पूरे बृजवासियों को उसके नीचे बुला लेते हैं और इंद्र के प्रकोप से बचा लेते हैं। जिससे भगवान इंद्र हार कर एक सप्ताह बाद वर्षा बंद कर देते हैं। जिस कारण बृजवासी भगवान कृष्ण एवं गोवर्धन महाराज की जय जयकार लगाते हैं। उन्होंने कहा भगवान को कठिन मार्ग से नहीं सच्चे प्रेम से, प्रभु को पाया जा सकता है। कथा के दौरान गोवर्धन भगवान की झांकी सजाई गई। संयोजक प्रदीप शर्मा ने बताया बिमल शर्मा एवं पुष्पा शर्मा को वैदिक मंत्रोचार के साथ गोवर्धन महाराज का विधिवत पूजन करवाया तथा गोवर्धन भगवान के 56 प्रकार के व्यंजनो का भोग लगाया। इस अवसर सुनिल शर्मा, आदित्य शर्मा, ताराचंद गुप्ता, जुगल मोदी, भोपालसिंह, संजय शर्मा, कैलाश सिंघानिया, शिवचरण हलवाई, कैलाश जांगिड़, किशोरीलाल टीबड़ा, उमाशंकर महमिया, ओमप्रकाश शर्मा, रमेश चौमाल, सुशील टीबड़ा, पुरुषोत्तम चौरासिया आदि भक्तगण मौजूद थे।
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