श्रीकृष्ण जन्म और नंदगांव गमन प्रसंग ने भाव-विभोर किए श्रद्धालु

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नंद के आनंद भयो, हाथी घोड़ा पालकी, जय हो कन्हैया लाल की, गूंज उठा पांडाल

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
स्थानीय स्काउट-गाइड मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म और उन्हें सुरक्षित नंदगांव पहुंचाने के मार्मिक प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा नजर आया। कथावाचक महराज का ने कहा अत्याचारी कंस के कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। जन्म लेते ही चारों ओर दिव्य प्रकाश फैल गया और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। इसके बाद पिता वसुदेव ने नवजात बालक को टोकरी में रखकर उफनती यमुना को पार किया। कथा में वर्णित हुआ कि किस प्रकार शेषनाग ने अपने फनों से वर्षा से रक्षा की और यमुना ने भी भगवान के चरण स्पर्श कर मार्ग प्रदान किया। वसुदेव जी बालक कृष्ण को सुरक्षित नंदगांव पहुंचाकर वहां नंद-यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और नंद के आनंद भयो हाथी घोड़ा पालकी। जय हो कन्हैया लाल की के जयघोष से पंडाल गूंज उठा। कथा के दौरान भजन-कीर्तन, पुष्प वर्षा और आरती का आयोजन किया गया। कथा संयोजक प्रदीप शर्मा अलसीसर वाले ने बताया ने मुख्य यजमान पुष्पा देवी व विमल शर्मा ने व्यासपीठ व भागवत पौथी की पूजा व आरती की। कथा के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सुनिल शर्मा, आदित्य शर्मा, दीपक शर्मा, अग्रवाल समाज समिति के अध्यक्ष गणेश हलवाई चिड़ावावाला, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष विनोद सिंघानिया, ओमप्रकाश ढंढ, केशरदेव सहल, राजकुमार केडिया, उमाशंकर महमिया, शिवचरण पुरोहित, रामगोपाल महमिया, सुरेंद्र शर्मा, गोपी पुरोहित, जुगल किशोर पाटोदिया आदि भक्तगण मौजूद थे।

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