मोदी वर्ल्ड स्कूल चेयरमैन डॉ. दिलीप मोदी स्पीकर विद ग्रेविटास में रखे विचार
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शेखावाटी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान मोदी वर्ल्ड स्कूल के लिए शनिवार का दिन बेहद खास और गौरवपूर्ण है। स्कूल के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. दिलीप मोदी को शनिवार को जयपुर के प्रसिद्ध होटल द ललित में आयोजित बड़े शैक्षिक सम्मेलन जीएसएलसी स्पार्क ड्यूक्स 2026 में मुख्य वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया गया है। उन्हें यहां एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्व स्पीकर विद ग्रेविटास के रूप में पेश किया गया है। जिनकी सोच और दूरदर्शिता शिक्षा की दिशा बदलने की ताकत रखती है। इस बड़े आयोजन का मुख्य विषय द न्यू ग्रेविटी रखा गया है। इसका सीधा मकसद उन ताकतों और बदलावों को समझना है। जो आने वाले समय में स्कूलों और पढ़ाई के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देंगे। डॉ. दिलीप मोदी इस मंच पर देश भर से आए शिक्षाविदों के सामने अपने विचार रख रहे हैं कि कैसे आधुनिक समय में स्कूलों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार होना चाहिए। डॉ. दिलीप मोदी ने एक पैनल चर्चा के दौरान आधुनिक शिक्षा पद्धति पर अपने विचार साझा किए। पाठ्यक्रम बनाम अनुभव विषय पर केंद्रित इस चर्चा में डॉ. मोदी ने स्पष्ट किया कि आज के युग में केवल किताबी ज्ञान छात्रों के भविष्य की चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने ने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य अंक तालिका तैयार करना नहीं। बल्कि एक सशक्त चरित्र का निर्माण करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, अंकों से ज्यादा चरित्र का महत्व है। पैनल चर्चा में उन्होंने बताया कि मोदी वर्ल्ड स्कूल में लर्निंग बाय डूइंग (करके सीखना) पर जोर दिया जाता है। रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर बच्चों को अनुभवों के माध्यम से सिखाना ही वास्तविक शिक्षा है हम सभी को बदलते समय के साथ स्वयं को अपग्रेड करने की जरूरत है। तकनीक और परंपरा का संगम आधुनिकता और तकनीक के दौर में भी भारतीय संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट क्लास और अत्याधुनिक लैब के साथ-साथ अनुशासन और नैतिक मूल्य स्कूल की प्राथमिकता हो। डॉ. मोदी के अनुसार स्कूली शिक्षा का लक्ष्य ऐसे ग्लोबल सिटीजन्स तैयार करना हो जो न केवल अपने कॅरिअर की ऊंचाइयों को छुए, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार भी हों। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में चेयरमैन डॉ. दिलीप मोदी के साथ मोदी वर्ल्ड स्कूल के प्राचार्य डॉ. रविशंकर शर्मा भी मौजूद रहे। जिन्होंने जयपुर में संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। डॉ. शर्मा की उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि उनका अनुभव भी शिक्षा के क्षेत्र में अपना अद्वितीय स्थान रखता है। साथ ही अपने 25 वर्षों से अधिक अनुभव से उन्होंने शेखावाटी क्षेत्र में सीबीएसई स्कूलों में एक बेहतरीन समन्वयक का कार्य किया किया है। निदेशक आकाश मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह बड़ा सम्मान डॉ. दिलीप मोदी को उनकी गहरी समझ और अनुभवी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया है तथा कार्यक्रम में उन्हें एक विशेष वक्ता का दर्जा मिला है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आने वाले कल की शिक्षा प्रणाली और स्कूलों में होने वाले क्रांतिकारी बदलावों पर चर्चा करना था। मोदी वल्र्ड स्कूल परिवार के लिए यह बड़े सम्मान की बात है कि डॉ. मोदी का नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की नई परिभाषा तय करने में अपना योगदान दे रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मान के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर नीरजा मोदी, निदेशिका गरिमा मोदी, छात्रावास निदेशक कुरड़ाराम धींवा, उप प्राचार्या सरोज सिंह, हैडमिस्ट्रेस उमा शर्मा, एडमिशन डायरेक्टर श्यामसुंदर शर्मा, प्रशासक कमलेश कुलहरि एवं स्कूल स्टाफ ने डॉ. मोदी को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की।
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