बजट में घोषणाएं आगे, नतीजे पीछे— जवाबदेही गायब : राहुल कस्वां

0
56

लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान शिक्षा, रोजगार, जल, सड़क व सिंचाई योजनाओं पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली।बजट पर चर्चा के दौरान लोकसभा में चूरू सांसद राहुल कस्वां ने सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपना भाषण शुरू करते हुए कहा कि वे सुर्खियों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ अपनी बात रख रहे हैं। सांसद कस्वां ने कहा कि बजट को गहराई से देखने पर साफ होता है कि घोषणाएं आगे दौड़ती हैं, लेकिन नतीजे पीछे रह जाते हैं और जवाबदेही शब्दों की ओट में कहीं खो जाती है।उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष बड़े-बड़े नामों से योजनाएं लॉन्च करती है, लेकिन उनके धरातली क्रियान्वयन और वास्तविक लाभ को लेकर कोई जवाबदेही तय नहीं होती। पीएम कौशल विकास योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 2021-22 में 11,500 करोड़ रुपये के आवंटन के मुकाबले केवल 10 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। इसी तरह 2023-24 में 11,600 करोड़ में से 8,400 करोड़, 2024-25 में 12,500 करोड़ में से 9,900 करोड़ और 2025-26 में 12,500 करोड़ के मुकाबले मात्र 6,170 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए।सांसद कस्वां ने शिक्षा क्षेत्र पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि समग्र शिक्षा अभियान में भी आवंटन के अनुरूप खर्च नहीं हुआ। राजस्थान का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के 56 प्रतिशत स्कूलों में कमरे जर्जर और अनुपयोगी हैं। करीब 2.83 लाख कमरे ऐसे हैं जहां बच्चों के बैठने की स्थिति तक नहीं है, जबकि 2.19 लाख कमरों को बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है। चूरू लोकसभा क्षेत्र में करीब 1,800 नए कमरों की जरूरत है और 50 डिग्री तापमान में बच्चे पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के ‘विकसित भारत’ विजन में शैक्षिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर कोई ठोस दृष्टि नजर नहीं आती।उन्होंने यह भी कहा कि 83 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में केवल आर्ट्स विषय उपलब्ध हैं, जबकि साइंस, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी और कॉमर्स जैसे विषयों की व्यवस्था नहीं है। मात्र 17 प्रतिशत स्कूलों में साइंस की सुविधा है और उनमें से भी 52 प्रतिशत में कार्यशील प्रयोगशालाएं नहीं हैं। ऐसे में बच्चे जॉब मार्केट की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा कैसे प्राप्त करेंगे।राहुल कस्वां ने पीएम इंटर्नशिप योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में भी बजट कटौती और खर्च न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन में 2025-26 के लिए 67 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन संशोधित अनुमान में केवल 17 हजार करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। राजस्थान में पीने के पानी की भारी कमी है, लेकिन कई टेंडर आज तक खुले नहीं हैं और 2021 के कार्य अब तक अधूरे हैं।मनरेगा को लेकर उन्होंने कहा कि राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ के कारण इस योजना के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है, जिससे मजदूरों की आजीविका और ग्रामीण विकास दोनों पर संकट आएगा। सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार की चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के चूरू, झुंझुनूं, नागौर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में व्यापक कृषि क्षेत्र होने के बावजूद सिंचाई के अभाव में किसान परेशान हैं।अंत में सांसद कस्वां ने राजस्थान में नए राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल लाइनों की मांग उठाई। उन्होंने सीकर-नोखा, खाटूश्यामजी-देशनोख वाया बीदासर, सरदारशहर-नोहर, सरदारशहर-हनुमानगढ़ और सादुलपुर-तारानगर होते हुए गजसिंहपुर रेल मार्गों को लंबे समय से लंबित बताते हुए सरकार से इनके निर्माण के लिए नए प्रावधान और ठोस कार्यवाही की मांग की।

राज्य बजट के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन | निराशाजनक बजट पर महासंघ का विरोध | Churu News

राजकीय विधि महाविद्यालय चूरू में मूट कोर्ट | अस्पताल लापरवाही केस पर छात्रों की बहस

बजट 2026 को लेकर क्या सोचती है चूरू की जनता? | Public Opinion | Churu Budget Reaction

कोर्ट के आदेश पर चूरू PWD ऑफिस पहुंची कुर्की टीम, 46.89 लाख की वसूली मामला

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here