खेतड़ी में 324 छात्र-छात्राओं को विवेकानंद पुस्तक और कैलेंडर वितरित किए गए

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डॉ. जुल्फिकार ने लिया एक लाख कैलेंडर निशुल्क वितरण करने का संकल्प

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
विवेकानंद पब्लिक विद्यालय राजोता और विनोदिनी स्नातकोत्तर महाविद्यालय खेतड़ी के छात्र-छात्राओं सहित खेतड़ीवासियों को विवेकानंद पुस्तक और विवेकानंद कैलेंडर निशुल्क वितरित किए गए। इस अवसर पर विद्यालय संचालक अशोकसिंह शेखावत, विनोदिनी प्राचार्य संतोष सैनी और भीमसर निवासी डॉ. जुल्फिकार ने छात्र-छात्राओं को स्वामी विवेकानंद और खेतड़ी राजा अजीत सिंह के रिश्तों की जानकारी देते हुए बताया कि स्वामी विवेकानंद अपने जीवन काल में तीन बार खेतड़ी आए थे। उनका नाम, पोशाक, पगड़ी शिकागो विश्वधर्म सम्मेलन सहित उनके जीवन की दर्जनों घटनाएं है। जो खेतड़ी से जुड़ी हुई है। खेतड़ी में देश का पांचवां और राजस्थान का पहला अजीत विवेक संग्रहालय बना है। जिसमें स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह के 109 दिन की विशिष्ट घटनाओं को दर्शाया गया है। इस अवसर पर 324 विवेकानंद पुस्तक और कैलेंडर विद्यालय और काॅलेज के छात्र-छात्राओं सहित खेतड़ीवासियों को वितरित किए गए। डॉ. जुल्फिकार ने न केवल स्वामी विवेकानंद पर पीएचडी की। बल्कि उनके जीवन और विचारों पर पांच पुस्तकें लिखकर उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आज वे प्रतिदिन गांव—ढाणियों में जाकर युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से परिचित करा रहे हैं। डॉ. जुल्फिकार मुस्लिम होने के बावजूद स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं और बीते कई वर्षों से उनकी शिक्षाओं को जन—जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। वे कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता, राष्ट्र निर्माण और युवा शक्ति को दिशा देने वाले हैं। इस युवा का दावा है कि रामकृष्ण मिशन खेतड़ी पर पीएचडी करने वाले वे देश के पहले मुस्लिम युवा है। उन्होंने वर्ष 2005 से 2009 के बीच स्वामी विवेकानंद पर गहन शोध किया, जिससे उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।

71 हजार 516 विवेकानंद कैलेंडर निशुल्क बांटे

पिछले सात सालों से डॉ. जुल्फिकार स्वामी विवेकानंद से जुड़े संदेशों वाले कैलेंडर निशुल्क वितरित करने का अभियान चला रहे हैं। अब तक 71 हजार 516 कैलेंडर दिल्ली सहित राजस्थान के अलवर जयपुर, बीकानेर, सीकर, चूरू, हनुमानगढ़, झुंझुनूं सहित कई जिलों के राजकीय-गैर राजकीय विद्यालयों, मदरसों, वेद विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वितरित किए जा चुके हैं। वे स्वयं झुंझुनूं जिले के आस-पास खेतड़ी राजोता, सिंघाना जसरापुर, भीमसर, नूआं, सिरियासर, आबूसर, अलसीसर, मलसीसर, टमकोर सहित अनेक गांवों में पहुंचकर युवाओं से संवाद करते हैं। उनके हाथ में भगवा नहीं, बल्कि किताबें होती है और जुबान पर केवल प्रेरणा। उनका लक्ष्य एक लाख युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार को पहुंचाना है। विवेकानंद कैलेंडर 2026 सभी धर्मों के प्रति समान आदर, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है तथा एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

2020 से शुरू हुआ विवेकानंद कैलेंडर अभियान

राष्ट्रीय युवा दिवस 2020 पर स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित आरएसएस (आरएसएस) मुख्यालय केशव कुंज, झंडेवालान में विवेकानंद कैलेंडर का विमोचन किया गया था। इस अवसर पर आरएसएस (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता एवं थिंक टैंक डॉ. इंद्रेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रचारक मौजूद रहे। तभी से यह कैलेंडर लगातार निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं।

तीन देशों के मठों में रहकर किया अध्ययन

डॉ. जुल्फिकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय सेमीनारों के तहत बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इन देशों के रामकृष्ण मठों व मिशन संस्थाओं में रहकर अध्ययन करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम प्रोफेसर हैं। उन्होंने देश के सबसे प्रसिद्ध वेलूर मठ सहित 50 से अधिक रामकृष्ण मठों और मिशन संस्थाओं में रहकर स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन के सामाजिक कार्यों का गहन अध्ययन किया।

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