यमुना जल को इतिहास दोहराया जा रहा है — यशवर्धन सिंह शेखावत

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शेखावत ने सरकार से पूछा— 4 महीने में बनने वाली डीपीआर 2 साल बाद भी बनी क्यों नहीं?

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शेखावाटी क्षेत्र को यमुना जल उपलब्ध कराने की बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धन सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि 2026 के बजट में की गई घोषणा कोई नई पहल नहीं, बल्कि वर्ष 2021 की प्रस्तावित योजना की पुनरावृत्ति मात्र है। यशवर्धन सिंह के अनुसार 12 जनवरी 2021 को तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय जल आयोग को भेजी गई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) में ताजेवाला (हथिनीकुंड) हेडवर्क्स से राजगढ़ एवं झुंझुनूं तक भूमिगत जल परिवहन प्रणाली के लिए 31,366.86 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत दर्शाई गई थी। केंद्रीय जल आयोग के लागत परीक्षण प्रकोष्ठ द्वारा इस राशि का परीक्षण भी किया गया था। समिति का दावा है कि 2026 के बजट में लगभग 32 हजार करोड़ रुपए की जिस परियोजना की घोषणा की गई है। वह मूलतः 2021 की डीपीआर में प्रस्तावित लागत के आसपास ही है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या कोई नई तकनीकी या वित्तीय प्रगति हुई है या नहीं।

स्वीकृति में देरी पर सवाल

यशवर्धन सिंह शेखावत ने प्रश्न उठाया है कि जनवरी 2021 से लेकर सत्ता परिवर्तन तक डीपीआर को अंतिम स्वीकृति क्यों नहीं मिली। यदि तकनीकी अथवा वित्तीय आपत्तियां थीं तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया, और यदि नहीं थीं तो दो वर्षों तक फाइल लंबित क्यों रही।

बजट घोषणा बनाम वास्तविक प्रगति

शेखावत ने कहा कि वर्ष 2026 के बजट में शेखावाटी तक यमुना का पानी पहुंचाने की घोषणा दोबारा की गई है। किंतु अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह घोषणा 2021 की डीपीआर पर आधारित है या 17 फरवरी 2024 को हरियाणा सरकार के साथ हुए समझौता ज्ञापन के तहत तैयार की जाने वाली नई डीपीआर पर। समिति के अनुसार यदि नई डीपीआर तैयार हो चुकी है तो उसकी लागत, संशोधित प्रावधान और केंद्र को भेजी गई स्वीकृति की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। अन्यथा इसे ठोस प्रगति के बजाय पुनः की गई बजटीय घोषणा माना जाएगा।

पारदर्शिता की मांग

यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक शेखवत ने कहा कि यह परियोजना शेखावाटी की जीवनरेखा है और राजगढ़ तथा झुंझुनूं जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। ऐसे में सरकार को वर्ष 2021 की मूल डीपीआर और केंद्रीय जल आयोग की टिप्पणियों को सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही 17 फरवरी 2024 के समझौता ज्ञापन की शर्तों और नई डीपीआर की वर्तमान स्थिति को भी स्पष्ट करना चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि परियोजना की वास्तविक लागत, वित्तीय व्यवस्था और समयसीमा को लेकर केंद्र व राज्य सरकार संयुक्त रूप से स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना जारी करें, ताकि जनता को वास्तविक प्रगति की जानकारी मिल सके। समिति ने अंत में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शेखावाटी के लाखों लोगों के अधिकारों से जुड़ा है, और जब तक परियोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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