झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजकीय बीडीके अस्पताल झुंझुनूं के पालना गृह का जिला जज दीपा गुर्जर तथा डालसा सचिव एडीजे डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी ने निरीक्षण किया गया। पालना गृह की माॅक ड्रील करते हुए पालना के बेड पर वजन रखा तो आपातकालीन इकाई मे घंटी बजी तो स्टाफ दौड़ते हुए पालना गृह की ओर आया। इसी दौरान जिला जज दीपा गुर्जर ने अस्पताल मे अब तक आए पालानगृह में बच्चों की संख्या के बारे में जानकारी ली गई। जिलेभर के सभी पालना गृहों में बीडीके अस्पताल में सर्वाधिक नवजात छोड़े गए है तथा परिजनों की पहचान उजागर नहीं की जाती है। अस्पताल के मुख्य द्वार, स्वागत कक्ष, नवजात शिशु इकाई, ओपीडी समेत विभिन्न जगहों लगाई गई आईईसी का अवलोकन किया गया तथा बड़ा पोस्टर मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया। धूप से फीकी हो रही आईईसी को फिर से प्रदर्शित करने एवं ओपीडी, आईपीडी मे आमजन को पालनागृह के बारे में बताने के लिए निर्देशित किया गया। जिला जज ने अस्पताल की साफ सफाई एवं वार्ड आईसीयू की सेवाओं को बेहतरीन बताया तथा बीडीके अस्पताल में जल्द ही वीसी के माध्यम से गवाही करवाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
शहर में स्थित दो रैन बसेरों का भी निरीक्षण किया
इसी तरह जिला जज दीपा गुर्जर तथा डालसा सचिव एडीजे डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी द्वारा नगर परिषद झुंझुनूं तथा पंचदेव मंदिर के पास स्थित रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया। दीपा गुर्जर ने बताया कि रैन बसेरों के निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कड़ाके की ठंड के बीच रैन बसेरों में ठहरे हुए निराश्रितों और जरूरतमंदों को मिलने वाली सुविधाओं और कानूनी अधिकारों की उपलब्धता को जांचना था। डालसा अध्यक्ष जिला जज दीपा गुर्जर ने रैन बसेरों में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, बिस्तरों की स्वच्छता और अलाव की व्यवस्था का निरीक्षण किया। अध्यक्ष दीपा गुर्जर द्वारा रैन बसेरे में रात्रि विश्राम के लिए उपस्थित आने वालों की संख्या काफी कम पाए जाने पर उक्त रैन बसेरों के प्रचार-प्रसार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि बिस्तरों पर चादरें नियमित रूप से बदली जाएं और पर्याप्त संख्या में कंबलों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। रैन बसेरे के रजिस्टर की जांच की गई और वहां ठहरे हुए लोगों की जानकारी ली गई। अध्यक्ष ने बताया कि यदि रैन बसेरे में रह रहे किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता की आवश्यकता है, तो वह सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है।
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