झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की पात्रता और सीमित इलाज राशि को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि सरकार आज भी योजना की पात्रता वर्ष 2011 की सामाजिक–आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों पर तय कर रही है। जो वर्तमान सामाजिक–आर्थिक वास्तविकताओं से लगभग पूरी तरह से अलग हैं। 15 वर्ष पुराने आंकड़ों के आधार पर आज के गरीबों की पहचान करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में महंगाई, बेरोजगारी, कोरोना महामारी और आर्थिक संकट के कारण लाखों परिवार गरीबी रेखा के नीचे आए हैं। लेकिन वे आयुष्मान भारत योजना से बाहर हैं। झुंझुनूं संसदीय क्षेत्र सहित राजस्थान में आज भी बड़ी संख्या में गरीब परिवार गंभीर बीमारी के समय इलाज से वंचित रह जाते हैं और कर्ज़, ज़मीन–जेवर गिरवी रखने या इलाज छोड़ने को मजबूर हैं। सांसद ने कहा कि वर्तमान पांच लाख रूपए की इलाज सीमा आज की अनेक बीमारियों की चिकित्सा लागत के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है। निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का खर्च कई गुना बढ़ चुका है, जिससे गरीब परिवारों को फिर से जेब से खर्च करना पड़ रहा है। सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की हैं की आयुष्मान भारत योजना की पात्रता के लिए नवीनतम आंकड़ों का उपयोग कर वंचित गरीब परिवारों को तुरंत योजना में शामिल किया जाए तथा इलाज सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपए प्रति वर्ष किया जाए। ताकि यह योजना वास्तव में गरीबों के लिए संजीवनी बन सके।
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