मनरेगा में संशोधनों और नए प्रावधानों के विरोध में धरना

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फावड़े लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे कांग्रेसी

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए संशोधनों और नए प्रावधानों के विरोध में सोमवार को झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। मंडावा विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मनरेगा मजदूर हाथों में कस्सी, परात और गेती लेकर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और नए एक्ट को मजदूर विरोधी करार दिया गया। धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। पूर्व में इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत किया जाता था, लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में बदल दिया गया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजस्थान सहित कई राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। प्रदेश में सामाजिक पेंशन का भुगतान लंबे समय से लंबित है, कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, छात्रवृत्तियों का भुगतान अटका हुआ है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। ऐसे हालात में राज्य सरकारों के लिए मनरेगा का 40 प्रतिशत खर्च वहन करना मुश्किल होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रभावित होगा। धरने में यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को केंद्रीकृत कर दिया है। पहले ग्राम पंचायतों को यह अधिकार था कि वे अपने क्षेत्र में कार्य योजना तैयार करें, लेकिन अब यह अधिकार केंद्र सरकार अपने हाथ में ले रही है। कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि इससे राजनीतिक भेदभाव बढ़ेगा और गैर-भाजपा शासित क्षेत्रों में मनरेगा के कार्य बाधित होंगे। जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध करती रहेगी और जब तक जनविरोधी प्रावधान वापस नहीं लिए जाते, आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला जब कार्यकर्ता अपने साथ खुदाई में इस्तेमाल होने वाले औजार कस्सी, परात, गेती लेकर आए। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि ये औजार मजदूरों के सम्मान के प्रतीक हैं और सरकार इनके हक पर डाका डाल रही है। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें नए कानून को वापस लेने और मनरेगा को पुराने स्वरूप में ही प्रभावी रखने की मांग की गई।

ये कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए धरने में

जिला प्रवक्ता और ओबीसी कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सैनी ने बताया कि इस दौरान पीसीसी सदस्य सलीम सिगड़ी, पीसीसी सदस्य पूर्व प्रधान शेरसिंह नेहरा, कांग्रेस के पूर्व जिलाधयक्ष सज्जन मिश्रा, एससी प्रकोष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हरिसिंह सांखला, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राहुल जाखड़, शिक्षक प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष धर्मपाल खेदड़, एससी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष अमरसिंह धीरज, विधि प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष एडवोकेट नवीन सैनी, पंचायती राज संगठन प्रदेश सचिव राजकुमार राठी, सेवादल जिलाध्यक्ष हारून लालपुर, डीसीसी के निवर्तमान उपाध्यक्ष जगदीश पूनियां, महासचिव आकाश चौधरी, युनूस गौरी, सचिव श्रीचंद झाझड़िया, मनोहर बाकोलिया, प्रवक्ता शाहबाज फारूकी, मंडावा चेयरमैन नरेश सोनी, बिसाऊ चेयरमैन मुश्ताक, बिसाऊ वाइस चेयरमैन रामगोपाल सैनी, जिला परिषद सदस्य विनिता रणवां, महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मधु खन्ना, झुंझुनूं ब्लॉक अध्यक्ष अजमत अली, गिडानिया ब्लॉक अध्यक्ष सुमेर महला, मुकुंदगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष सुरेश मेघवाल, मंडावा ब्लॉक अध्यक्ष किरोड़ीमल पायल, अलसीसर ब्लॉक अध्यक्ष यज्ञपाल, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष तैयब अली, मोहरसिंह सोलाना, बिसाऊ नगर कांग्रेस अध्यक्ष अयूब, मंडल अध्यक्ष मुमताज अली, राकेश राहड़, शीशराम, अजयपाल, शंकर कपूरिया, जगदीशप्रसाद, कैप्टन मोहनलाल, लक्ष्मण सैनी, विश्वंभर पूनियां, प्यारेलाल तेतरवाल, शीशराम बुगालिया, ख्यालीराम, परमेंद्र, सरपंच महावीर प्रसाद, अनिल कटेवा, एससी प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष रविदत्त गुरु, महासचिव रामस्वरूप आसलवासिया, सचिव कृष्ण चावला, सत्यनारायण सहित सैंकड़ों कांग्रेस जन इस दौरान मौजूद रहे।

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