गुढ़ागौड़जी । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
काटली नदी बचाओ जन अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से राजकीय आवास पर आयोजित जन सुनवाई में भेंट कर काटली नदी को पुनर्जीवित करने की मांग की। पाकिस्तान को सिंधु जल समझौता अंतर्गत दिया जाने वाले पानी के करार को ऑपेरशन सिंदूर के समय भारत ने रद्द कर दिया था। उक्त जल को काटली नदी में बांध बनाकर पाइपलाइन के जरिए प्रवाहित किए जाने की मांग की। सरस्वती रूरल एंड अरबन डवलपमेंट सोसाइटी झुंझुनूं अध्यक्ष सुभाष कश्यप ने मांग पत्र में नदी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए बीजी राम जी के जरिए उपयोगी कार्य करवाते हुए पौधारोपण, समतलीकरण, सीमांकन इत्यादि की मांग की। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में केंद्र सरकार से चंबल, काली सिंध, पार्वती, लूणी, साहबी, घग्घर, काटली, सोती, बनास, बाण इत्यादि नदियों को आपस मे जोड़ने, नदी बहाव क्षेत्र के जल दोहन को नियंत्रित करने, ड्रोन द्वारा कृत्रिम बारिश करवाने व काटली नदी की 1947 की राजस्व रिकॉर्ड स्थिति को बहाली, आस पास की बंजड़, चारागाह एवं वन विभाग की भूमि को भी अतिक्रमण मुक्त करवा कर इसे वन्य जीव अभ्यारण बनाने की मांग की। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश पर काटली नदी से अतिक्रमण हटाने का महा अभियान जारी है। ऐसे में सरकार को भविष्य में होने वाले फिर से अतिक्रमणों की प्रभावी रोक की मांग का आग्रह करते हुए काटली नदी के सहायक नालों व जल स्रोतों को भी अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की। काटली नदी में अतिक्रमण हटाने व आवंटन निरस्त करने के उपरांत प्रभावित व्यक्तियों की आजीविका के लिए संबंधित को विस्थापित अथवा आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया। काटली नदी बचाने के लिए विस्तृत कार्य योजना मांग पत्र के अनुसार यह नदी वैदिक काल मे जयपुर जिले के शाहपुरा से आरंभ होकर वर्तमान के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर आदि जिलों में बहती हुई सिंधु नदी में जाकर मिलती थी। यह प्रमुख जल मार्ग थी तथा इसके किनारे ताम्र कालीन गणेश्वर व सुनारी सभ्यता थी। जिसका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से है। उस समय व्यापार का प्रमुख मार्ग भी रही है। परंतु वर्तमान में काटली नदी लुप्त हो चुकी है। जिसके पुनर्जीवित हो जाने से शेखावाटी की 80 लाख से अधिक की आबादी सीधे लाभान्वित होगी। कश्यप ने काटली नदी के साथ साथ राज्य के सभी नदी नालों व जल स्रोतों के संरक्षण के स्थायी उपाय के लिए राजस्थान नदी व जल संरक्षण आयोग बनाने की मांग की।
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