झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
भारत सरकार द्वारा संचालित 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद कुमार ओला द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए। जिले के प्रतिष्ठित सीएलसी शैक्षणिक संस्थान झुंझुनूं में एक भव्य एवं प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। बाल अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति आमजन एवं विशेष रूप से बच्चों को जागरूक करना तथा इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक संकल्प को सशक्त बनाना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी उपस्थित रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथियों के रूप में राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह के अधीक्षक अंकित मील, सदर सीआई मांगीलाल मीणा, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जिला परियोजना समन्वयक महेश कुमार, सीएलसी शैक्षणिक संस्थान के संस्था प्रधान उपकरण सिंह, आउटरिच वर्कर पूनम जांगिड़ व सुमन भी कार्यक्रम में उपस्थित रही। कार्यक्रम में संस्थान के समस्त स्टाफ, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों की जानकारी देते हुए बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। न्यायाधीश डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका एवं कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना है। उन्होंने बच्चों को नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी अवगत कराया तथा बताया कि इस हेल्पलाइन के माध्यम से कानूनी सहायता निशुल्क प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी बच्चों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने का संकल्प दिलवाया और स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना प्राप्त हो, तो उसे छुपाने के बजाय तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर सूचना देना प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अन्य अधिकारियों ने भी अपने-अपने वक्तव्य दिए। अधीक्षक अंकित मील ने किशोरों के संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित जानकारियां साझा की। वहीं सदर सीआई मांगीलाल मीणा ने कानून व्यवस्था की दृष्टि से बाल विवाह रोकने में पुलिस की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की समस्या या अपराध की स्थिति में निर्भिक होकर प्रशासन से संपर्क करें। संस्था प्रधान उपकरण सिंह ने अपने उद्बोधन में बाल अधिकारिता विभाग एवं सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक नागरिक तैयार करना भी उनका प्रमुख दायित्व है। कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों, अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त करने की शपथ ली तथा संकल्प बैनर पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम के अंतिम चरण में परियोजना समन्वयक महेश कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह सेवा 24 घंटे, 365 दिन बच्चों की सहायता के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की बाल अधिकारों से जुड़ी समस्या जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत 1098 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ समाप्त कर समाज में सभी बच्चों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य के अधिकार की मुख्य धारा से जोड़ना है।
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