बाल अधिकारिता विभाग की त्रैमासिक बैठक में शिशु पालना गृह के पोस्टर का विमोचन

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झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
बाल अधिकारिता विभाग की त्रैमासिक बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिला कलेक्टर ने त्रैमासिक अवधि में विभिन्न विभागों द्वारा बाल कल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की समीक्षा की तथा बच्चों से संबंधित प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल तस्करी से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतते हुए ऐसे बच्चों की पहचान कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर शिशु पालना गृह के प्रचार-प्रसार हेतु विशेष रूप से तैयार किए गए पोस्टर का विमोचन भी जिला कलेक्टर द्वारा किया गया। पोस्टर विमोचन के दौरान जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने कहा कि नवजात शिशुओं का जीवन अनमोल है और किसी भी परिस्थिति में उन्हें असुरक्षित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि फेंके नहीं, हमें दें की भावना को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाए। ताकि मजबूरीवश या सामाजिक कारणों से शिशु को छोड़ने की स्थिति में माता-पिता शिशु पालना गृह जैसी सुरक्षित एवं मानवीय व्यवस्था का उपयोग कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा शिशु पालना गृह में शिशु सौंपने वालों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद कुमार ओला ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में शिशु पालना गृह योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित, गोपनीय एवं संवेदनशील है, जहां बिना किसी कानूनी भय के शिशु को सुरक्षित रूप से सौंपा जा सकता है। शिशु पालना गृह योजना का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं को परित्यक्त होने, कुपोषण, शोषण अथवा मृत्यु जैसे खतरों से बचाना है। यहां शिशुओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा, पोषण, सुरक्षा एवं देखभाल उपलब्ध कराई जाती है तथा नियमानुसार उनके पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाती है। बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि शिशु पालना गृह से संबंधित जानकारी को आमजन तक पहुंचाने के लिए सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर एवं प्रचार सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, पुलिस विभाग, चिकित्सा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजकीय गृह, किशोर न्याय बोर्ड, पंचायती राज विभाग, स्काउट गाइड, अल्पसंख्यक विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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