मोरारका कॉलेज में बोध दिवस मनाया गया

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झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
श्री राधेश्याम आर. मोरारका राजकीय महाविद्यालय की अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) इकाई द्वारा शुक्रवार को कर्तव्य बोध दिवस का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह ने की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रोफेसर हरिराम आलड़िया रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. हरिराम आलड़िया ने अपने वक्तव्य में कहा कि कर्तव्य बोध दिवस प्रतिवर्ष 12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद जयंती से 23 जनवरी सुभाष जयंती के बीच मनाया जाता है। भारतवर्ष में हर युग में कर्तव्य की प्रधानता रही है, चाहे वैदिक काल हो, महाभारत काल हो या रामायण काल। श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ चलाकर भी कर्तव्य पालन किया था। हमारे अधिकार तभी तक सुरक्षित हैं। जब तक हम अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन करते हैं। इकाई अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह ने कहा की वर्तमान में जो हमें पद मिला है, क्या हम उसका पूर्ण निष्ठा से कर्तव्य पालन कर रहे हैं, आज हम सबके लिए आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है। यदि हम पूर्ण निष्ठा से अपना कर्तव्य पालन करेंगे तभी समाज के समक्ष आदर्श प्रस्तुत कर सकेंगे। विद्यार्थियों के व्यक्तिगत एवं सम्पूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए हम सभी आचार्यों का यह दायित्व है। हम सभी को सरकारी सेवा नियमों और वित्तीय नियमों की जानकारी होनी चाहिए। हमारे कर्तव्य का हिस्सा है। हम सभी के अंदर ईश्वर विराजमान हैं, जो हमें अपने कर्म का फल अवश्य देता है। डॉ. शुभकरण कुमावत इकाई सह सचिव ने अपने वक्तव्य में कहा कि गीता का श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उदाहरण देते हुए कहा कि गीता का उपदेश आध्यात्मिक उपदेश नहीं है, यह कर्तव्य गाथा है। जीवन में पूर्ण निष्ठा व समर्पण से कार्य करने पर सफलता निश्चित रूप से मिलती है। इसलिए निरंतर कार्य करते रहना ही कर्तव्य बोध है। उन्होंने गौतम बुद्ध और सुभाषचंद्र बोस के जीवन के उदाहरणों के द्वारा कर्तव्य पालन का आह्वान किया। देश की आज़ादी के लिए स्वतंत्रता सैनानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और आज भी हमारे सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। यदि देश का हर नागरिक अपने कर्तव्य का पालन करे तो आत्मनिर्भर, स्वावलंबी एवं विकसित, विश्वगुरु भारत का सपना साकार हो सकता है। इसलिए हम सभी कर्तव्य पालन द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाकर मानवता के विकास में योगदान दें। डॉ. भंवरलाल ने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। कर्तव्य बोध आंतरिक बल और इच्छा पर निर्भर करता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक रहेंगे तो शैक्षिक वातावरण बहुत अच्छा रहेगा। डॉ. शुभकरण ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कर्तव्य वह चुंबक है जिसके आकर्षण में अधिकार स्वयं चले आते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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